गुजरात के गांधीनगर, साबरकांठा, खेड़ा, अरावली और पंचमहाल जिलों में सैंड फ्लाई के कारण 15 साल से कम उम्र के बच्चों में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
सैंड फ्लाई क्या है?
- पहचान: यह मच्छर से भी छोटा कीट है, जो लीशमैनियासिस (कालाजार) नामक गंभीर बीमारी फैलाता है।
- कहाँ पाई जाती है: नमी वाली जगहों, झाड़ियों, मिट्टी की दरारों, पशुओं के बाड़ों और गंदगी वाले इलाकों में (मुख्यतः शाम और रात के समय सक्रिय)।
- फैलने का तरीका: यह केवल संक्रमित सैंड फ्लाई के काटने से फैलती है। छूने, हाथ मिलाने या साथ भोजन करने से यह बीमारी नहीं फैलती।
प्रमुख लक्षण
- प्रारंभिक लक्षण: काटने वाली जगह पर लाल दाने, खुजली, जलन और सूजन।
- संक्रमण बढ़ने पर: कई दिनों तक लगातार बुखार, अत्यधिक थकान, वजन कम होना, भूख न लगना, एनीमिया, तथा लीवर और तिल्ली में सूजन।
बचाव के उपाय
- घर और आसपास सफाई रखें तथा नमी या कचरा जमा न होने दें।
- रात के समय शरीर को पूरी तरह ढकने वाले कपड़े पहनें।
- कीटनाशक युक्त मच्छरदानी और मॉस्किटो रिपेलेंट क्रीम का उपयोग करें।
- बुखार या त्वचा पर घाव जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

